Wednesday, 4 March 2015

इतिहास में आज: 5 मार्च

पांच मार्च 1931 के दिन भारत में राष्ट्रीय आंदोलन के नेता मोहन दास करमचंद गांधी और तत्कालीन वाइसरॉय के बीच एक अहम समझौता हुआ, जिसे गांधी इरविन पैक्ट के नाम से जाना जाता है.
1929 में वाइसरॉय लॉर्ड इरविन ने भारत को डोमिनियन स्टेटस देने की घोषणा की थी हालांकि ये क्या होगा इसके बारे में कोई ठोस रूपरेखा नहीं बनी थी. 1931 में गोल मेज सम्मेलन के दौरान भारत के संविधान के बारे में चर्चा होनी थी.
गांधी और इरविन के बीच इस समझौते से पहले आठ बैठकें हुई. 1931 में पांच मार्च के दिन दोनों ने एक समझौते पर दस्तखत किए. इसमें तय किया गया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सविनय अवज्ञा आंदोलन खत्म करेगी और लंदन में होने वाले गोलमेज सम्मेलन में हिस्सा लेगी. इसमें यह भी तय किया गया कि ब्रिटिश सरकार इंडियन नेशनल कांग्रेस की गतिविधियों पर रोक लगाने वाले सभी आदेश वापस ले लेगी. हिंसा के अलावा सभी अपराधों के मामले में मुकदमे वापस ले लिए जाएंगे.
समझौते में सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान पकड़े गए सभी लोगों को रिहा करना तय हुआ. इसके अलावा तय हुआ कि नमक कर हटा दिया जाए, ताकि भारतीय उसे कानूनी रूप से बना कर बेच सकें और निजी इस्तेमाल भी कर सकें.
ब्रिटिश राज को समाप्त करने की मांग करने वाली पार्टी के साथ किए गए समझौते पर भारत में मौजूद ब्रिटिश प्रशासन और इंग्लैंड में प्रशासन ने काफी नाराजगी जताई और इसे अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा बताया. लेकिन ब्रिटिश सरकार ने सभी मांगें मान ली. क्योंकि उसे यह समझ में आ गया था कि कांग्रेस और गांधी के बिना गोलमेज सम्मेलन सफल नहीं हो सकेगा.

No comments:

Post a Comment